7 अगस्त को सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने मक्का में एक बड़ा डिफेंस पैक्ट साइन किया। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन और पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ — तीनों ने मिलकर तय किया कि अगर इनमें से किसी एक देश पर हमला हुआ, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा, बिल्कुल नाटो के आर्टिकल-5 जैसा फॉर्मूला। लोग इसे "इस्लामिक नाटो" तक कहने लगे हैं। यह पैक्ट यूं ही नहीं बना। दरअसल फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया था, जिसके बाद से इलाके में लगातार तनाव है। ईरान और उसके सहयोगी गल्फ देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहे थे, यहां तक कि सऊदी अरब पर भी ईरानी ड्रोन हमले हुए। ऐसे माहौल में इन तीनों देशों ने अमेरिका पर पूरी तरह भरोसा करने की बजाय अपनी खुद की सुरक्षा व्यवस्था खड़ी करने का फैसला लिया।

ईरान को न्योता क्यों? 

ईरानी न्यूज एजेंसी के हवाले से खबर आई कि ईरान को भी इस समझौते में शामिल होने का ऑफर मिला है। ईरानी अधिकारी मेहदी रहीमी ने कन्फर्म किया कि प्रस्ताव आया है और उस पर विचार चल रहा है। हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय या बाकी तीनों देशों की तरफ से अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दिलचस्प बात ये है कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर भी इसी दौरान तेहरान पहुंचे — जिसे लोग इस बढ़ती नजदीकी से जोड़कर देख रहे हैं। पाकिस्तान के डिफेंस मिनिस्टर ख्वाजा आसिफ पहले ही कह चुके हैं कि यह पैक्ट कोई "एक्सक्लूसिव क्लब" नहीं बनेगा, यानी दरवाजे सबके लिए खुले हैं। यही नहीं, कतर, कुवैत और बांग्लादेश जैसे कई और देश भी इसमें दिलचस्पी दिखा चुके हैं।

क्या है ट्रंप और हॉर्मुज का एंगल? 

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पैक्ट को "साहसिक और ऐतिहासिक" कदम बताते हुए इसका स्वागत किया। लेकिन दूसरी तरफ, ट्रंप के हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर दिए बयानों ने ईरान को भड़का दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर हॉर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र जैसा दिखाने की कोशिश की, जिसे ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसेन रेजाई ने साफ कहा कि फारस की खाड़ी में अमेरिका का दबदबा अब खत्म हो रहा है और हॉर्मुज पर अमेरिकी दावे हकीकत से कोसों दूर हैं।

ईरानी राष्ट्रपति ने दिया बयान

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने हाल ही में कहा कि अमेरिका उनके देश को "वेनेजुएला जैसे हालात" में धकेलना चाहता था, लेकिन ईरानी जनता ने डटकर मुकाबला किया। उन्होंने देश की एकता की तारीफ करते हुए लोगों से आर्थिक मुश्किलों के बीच भी संयम बनाए रखने की अपील की।