दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 अगस्त को रिजर्वेशन के खिलाफ प्रदर्शन किया गया है। NEET पेपर लीक और Competitive परीक्षाओं में क्लैरिटी को लेकर चल रही बहस के बीच रिजर्वेशन और UGC के कुछ नियमों का मुद्दा भी चर्चा में आ गया है। सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह अभियान सड़क तक पहुंच गया, जहां प्रोटेस्टर्स ने शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मेरिट के साथ फाइनेंशियल कंडीशन को ज्यादा इम्पोर्टेंस देने की मांग की।
जंतर-मंतर पर जुटे प्रोटेस्टर्स
21 अगस्त को दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर छात्रों और युवाओं के प्रदर्शन का सेंटर बना। रिजर्वेशन के खिलाफ बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी यहां पहुंचे। यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ, जब NEET पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर छात्रों और युथ के बीच पहले से ही बहस चल रही है। प्रदर्शनकारियों ने रिजर्वेशन के साथ-साथ UGC के कुछ नियमों को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की।
सोशल मीडिया से प्रदर्शन को मिली आवाज
सोशल मीडिया के जरिए इस प्रदर्शन की अपील की गई थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट, वीडियो और कैंपेन के जरिए युवाओं से 21 अगस्त को जंतर-मंतर पहुंचने को कहा गया था। आयोजकों का दावा है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल या विदेशी फंडिंग से जुड़ा नहीं है, बल्कि युवाओं की अपनी आवाज है।
मेरिट और फाइनेंशियल कंडीशन को इम्पोर्टेंस देने की मांग
प्रदर्शनकारियों की अहम मांग है कि सरकारी नौकरियों और एजुकेशनल ऑर्गेनाइजेशन को मौका देते समय मेरिट के साथ फाइनेंशियल कंडीशन और जरूरत को भी महत्व दिया जाए। उनका कहना है कि जरूरतमंद लोगों को जाति के बजाय उनकी आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के आधार पर सहायता और अवसर मिलना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने दिव्यांग लोगों, अनाथ बच्चों और शहीदों के परिवारों जैसे विंग को भी इम्पोर्टेंस देने की मांग उठाई है। हालांकि, भारत में मौजूदा रिजर्वेशन व्यवस्था सामाजिक और एजुकेशन सेक्टर में पिछड़ेपन को ध्यान में रखकर बनाई गई है। ऐसे में इसमें बदलाव की मांग पर सरकार और संविधान के बीच बड़ी बहस हो सकती है।
जंतर-मंतर से रामलीला मैदान जाने को कहा गया
प्रदर्शन के दौरान प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच टेंशन बढ़ गई। प्रशासन ने प्रदर्शन का स्थान जंतर-मंतर से बदलकर रामलीला मैदान करने को कहा। साथ ही प्रोटेस्टर्स की संख्या को लिमिटेड यानी 500 रखने की बात भी सामने आई। प्रदर्शनकारियों ने इस फैसले का विरोध किया और जंतर-मंतर पर ही प्रदर्शन जारी रखा। इस दौरान जंतर-मंतर पर नारेबाजी के साथ पोस्टर और भगवा झंडे भी नजर आए। प्रदर्शनकारियों ने ग्रुप में रहकर हनुमान चालीसा का पाठ किया। जैसे-जैसे शाम आगे बढ़ी, इलाके में दिल्ली पुलिस और RAF की तैनाती बढ़ा दी गई।
प्रदर्शनकारियों को रात में पुलिस ने लिया हिरासत में
रात करीब 8:40 बजे पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर से हटाना और हिरासत में लेना शुरू किया। इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस बसों की छतों पर चढ़ गए और नारेबाजी करने लगे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई को अपनी आवाज दबाने की कोशिश बताया। वहीं प्रशासन का कहना था कि प्रदर्शनकारियों को रामलीला मैदान में प्रदर्शन की परमिशन दी गई थी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई जरूरी थी। इस पूरे इंसिडेंट के बाद रिजर्वेशन, मेरिट और UGC के नियमों को लेकर बहस और तेज हो गई है।
आगे क्या?
21 अगस्त का प्रदर्शन केवल रिजर्वेशन के खिलाफ उठी आवाज तक सीमित नहीं रहा। NEET पेपर लीक के बाद परीक्षा व्यवस्था, मेरिट और रिजर्वेशन को लेकर चल रही बहस में अब UGC के नियमों का मुद्दा भी जुड़ गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना जरूर होगा कि यह आंदोलन कितना आगे बढ़ता है और क्या रिजर्वेशन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े ये मुद्दे देश की नीति और राजनीति में बड़ा स्थान बनाते हैं।