झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 को 19 अप्रैल 2026 को झारखंड में आयोजित करवाया गया था। इसका रिजल्ट कुछ महीनों बाद 2 जुलाई को डिक्लेअर भी कर दिया गया, लेकिन रिजल्ट आने के बाद एक स्टूडेंट की OMR शीट की कार्बन कॉपी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगी, जिसके बाद ही प्रशासन और उम्मीदवारों के बीच महाभारत शुरू हो गई। उम्मीदवारों और छात्रों के हित में बोलने वाले संगठनों का सवाल उठना शुरू हो गया कि नीट पेपर लीक के बाद भी आखिर JPSC की परीक्षा में इतनी लापरवाही कैसे की जा सकती है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होने की मांग रखी गई।  

CBI की क्यों हुई मांग?

अभी तक मामले की पूरी जांच CID कर रही थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में रखी याचिका में CBI जांच की मांग की गई है। ये कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि पूरे मामले से जुड़े अधिकारीयों और एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस दौरान कहा जा रहा है कि राज्य की अपनी ही एजेंसियों से निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना एक जोखिमी फैसला हो सकता है। ऐसे में CBI को जांच का जिम्मा सौंपने से उम्मीदवारों का भरोसा अटूट रहेगा।  

सबूतों से छेड़खानी की अपील 

SC को रखी याचिका में सिर्फ जांच एजेंसी के बदलने की नहीं बल्कि यह भी मांग की गई है कि परीक्षा से जुड़े हर जरूरी सबूत की हेरा-फेरी से भी बचाव किया जाए, फिर चाहे वो OMR शीट, CCTV फुटेज, सर्वर का डेटा या कोई और डिजिटल रिकॉर्ड हो। इसके पीछे की वजह यह है कि अगर ये सबूत समय रहते सुरक्षित नहीं रखे गए, तो आगे चलकर निष्पक्ष जांच करना मुश्किल हो सकता है।

आज की सुनवाई क्यों है खास?

आज SC यह तय करेगा कि मामले की जांच आगे राज्य CID ही जारी रखेगी या फिर उसे CBI जैसी केंद्रीय एजेंसी को सौंप दिया जाएगा। ये एक अहम फैसला है क्योंकि ये सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सिमित नहीं रहेगा बल्कि इसका असर हजारों उम्मीदवारों और युवाओं पर भी पड़ेगा जिन्होंने यह परीक्षा दी है और उनकी मेहनत का फल मीठा नहीं बल्कि गड़बड़ी के रूप में उभरकर आया है। गौर करने वाली बात ये है कि JPSC पेपर लीक से जुड़ा युवाओं का गुस्सा कोई नई बात नहीं है, बल्कि ऐसे मानले सामने आते रहते हैं। इसलिए आज की सुनवाई का नतीजा सिर्फ इस एक परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि आने वाले समय में हर एक ऐसी परीक्षा के लिए अहम माना जा रहा है।