हाल ही में यूपी सरकार ने स्कूलों की वीडियो रिकॉर्डिंग पर रोक लगाई है, जबकि कुछ वक्त पहले ही NGO के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के जवाब में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऑपरेशन कायाकल्प के जरिए सरकारी स्कूलों में सुधार का दावा किया था। 17 अगस्त को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कहते हैं कि स्कूलों के वीडियो बनाइए... खूब बनाइए। लेकिन इसके कुछ ही दिनों बाद यूपी के कई जिलों से सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति बाहरी लोगों, यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों की एंट्री और वीडियो रिकॉर्डिंग पर रोक की खबरें आती हैं। इसी दौरान यूपी के अलग-अलग हिस्सों में Gen Alpha के बच्चे खुद स्कूलों की बदहाल व्यवस्था को लेकर सड़कों पर उतरते दिखाई देते हैं। तो क्या योगी सरकार को Gen Alpha के बढ़ते सवाल परेशान कर रहे हैं? या फिर मामला सिर्फ बच्चों की सुरक्षा, स्कूल की गरिमा और बिना परमिशन शूटिंग पर रोक लगाने का है? 

क्या है ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान? 

यह अभियान CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके की पहल है। इसकी शुरुआत 15 अगस्त 2026 को महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के संतुक पिंपरी गांव से की गई। इस अभियान का उदेश्य ग्रामीण सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को सामने लेकर आना है। इसके तहत दीपके द्वारा अभिभावकों और स्थानीय लोगों से स्कूलों का सोशल ऑडिट करने की अपील की गई है। जिससे स्कूलों में पानी, बिजली, शौचालय, फर्नीचर और मिड-डे मील जैसी सुविधाओं की स्थिति जांचकर कमियों को उजागर किया जा सके। दीपके ने सरपंचों से भी स्कूलों की सुविधाएं सुधारने की अपील की है। उनका कहना है कि अगर एक सरपंच भी अपने गांव के स्कूल की स्थिति में सुधार करता है तो दूसरे गांव के सरपंच भी इसे एक हेल्थी कम्पटीशन के तौर पर ले सकते हैं। 

क्या हैं विपक्षियों के आरोप? 

वहीं, अब विपक्षी पार्टियों द्वारा योगी सरकार पर आरोप लगाए जा रहे हैं। विपक्षियों का कहना है कि पहले सरकार कहती है स्कूलों के वीडियो बनाओ जिससे स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं में सुधार हो सके, लेकिन अब वही योगी सरकार इन पर रोक क्यों लगा रही है। इन सब आरोपों का जबाव देते हुए 17 अगस्त को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा—“आज लोग कह रहे हैं कि स्कूलों की वीडियो बनाएंगे तो बिल्कुल वीडियो बनाइए , खूब बनाओ।” 

मुख्यमंत्री योगी का क्या है कहना? 

मुख्यमंत्री योगी 'ऑपरेशन कायाकल्प' के तहत हुए कामों को गिनाते हुए कहते हैं कि स्कूलों में फ्लोरिंग, लड़के और लड़कियों के लिए अलग शौचालय, पेयजल, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी और फर्नीचर जैसी सुविधाओं पर काम हुआ है। साथ ही उन्होंने 2017 से पहले के स्कूलों के हालातों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले स्कूलों में कई जगह भवन नहीं थे, भवन थे तो शिक्षक नहीं थे और जहां शिक्षक और बच्चे दोनों थे, वहां भी बुनियादी सुविधाओं की कमी थी। यानी योगी जी का साफ कहना है कि हमारे यहां स्कूलों में बदलाव हुआ है तो उसे कैमरे में दिखाइए। यूपी सरकार ने 2025 में भी दावा किया था कि 'ऑपरेशन कायाकल्प' से लगभग 96 प्रतिशत परिषदीय विद्यालय लाभान्वित हुए हैं और इसके तहत राज्य के 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों का पूरी तरह नवीनीकरण किया जा चुका है।

क्या है ऑपरेशन कायाकल्प?

इस ऑपरेशन की शुरुआत जून 2018 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गई जिसे सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाएं सुधारने के लिए चलाया गया था। इसका उद्देश्य सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं को बेहतर करना है। इसके कार्यक्रम के तहत स्कूलों में 19 बुनियादी मानकों पर काम किया जाता है। इनमें सुरक्षित पेयजल, बालक-बालिकाओं के लिए अलग शौचालय, हैंडवॉश यूनिट, बिजली, कक्षा में फर्नीचर, टाइल्स, ब्लैकबोर्ड और बाउंड्री वॉल जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा दिव्यांग-अनुकूल सुविधाओं पर भी काम किया जाता है। सरकार के मुताबिक, इसी कार्यक्रम के तहत हजारों स्कूलों में मरम्मत और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर किया गया है।

वीडियो बनाने पर रोक क्यों? 

अगस्त के दूसरे पखवाड़े में यूपी के कई जिलों से ऐसे आदेश सामने आए, जिनमें बिना अनुमति बाहरी लोगों, यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों के स्कूल परिसर में प्रवेश और कई जगह फोटो-वीडियोग्राफी पर रोक की बात कही गई। अयोध्या, बलिया, बस्ती, आजमगढ़, आगरा, फर्रुखाबाद और दूसरे जिलों में बिना अनुमति बाहरी लोगों, यूट्यूबर्स या सोशल मीडिया से जुड़े लोगों के स्कूल परिसर में प्रवेश और फोटो-वीडियोग्राफी को लेकर रोक या पाबंदियां लगाई गईं। अधिकारियों का कहना है कि यह रोक बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी है। पढ़ाई का माहौल खराब नहीं होना चाहिए और बिना अनुमति स्कूल परिसर में शूटिंग नहीं होनी चाहिए। यानी योगी सरकार का तर्क है कि वे बिना अनुमति प्रवेश और शूटिंग को नियंत्रित करना चाहते है, न कि स्कूलों की उपलब्धियों को छिपाना। 

Gen Alpha सड़कों पर क्यों? 

यूपी के कई हिस्सों से Gen Alpha के विरोध प्रदर्शन भी सामने आए हैं। Gen Alpha सड़कों पर क्यों उतर आए हैं? 17 अगस्त को लखनऊ में करीब 250 छात्राओं ने शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं को लेकर प्रदर्शन किया। वहीं उन्नाव में छात्रों ने शिक्षकों की कमी और स्कूल में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर सड़क पर विरोध किया। अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि स्कूलों में वीडियो क्यों बनाए जा रहे हैं या क्यों रोके जा रहे हैं। सवाल ये है कि अगर सरकार को अपने स्कूलों में हुए सुधार पर भरोसा है, तो फिर ग्राउंड रिपोर्टिंग और सोशल ऑडिट से डर कैसा? और अगर रोक की वजह बच्चों की सुरक्षा है, तो क्या पारदर्शिता और सुरक्षा के बीच कोई ऐसा रास्ता नहीं निकाला जा सकता, जिसमें दोनों कायम रहें? क्या सरकारी स्कूलों की असली तस्वीर सिर्फ सरकारी निरीक्षण से सामने आएगी? या बच्चों, अभिभावकों और आम लोगों की आवाज को भी जगह मिलेगी? और अगर स्कूल वाकई सुधरे हैं, तो कैमरे से डर कैसा? और अगर कहीं कमी है, तो उस कमी की तस्वीर सामने आने से रोकना समाधान कैसे हो सकता है?