उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बड़े पैमाने पर नौकरियों की भर्तियां शुरू करने जा रही है। योगी सरकार अगले चार महीने के भीतर एक लाख युवाओं को ज्वायनिंग लेटर देने की तैयारी में है। इनमें सबसे ज्यादा भर्तियां यूपी पुलिस औऱ होमगार्ड्स में होने जा रही है। विभिन्न विभागों में खाली पड़े पदों की जानकारी चयन आयोग को भेजी जा रही है। मुख्य सचिव एसपी गोयल को इसकी निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है।
कहां-कहां हैं नौकरियां
युवाओं के लिए सब इंसपेक्टर पद के लिए 3269 पदों पर भर्ती के अवसर मिलने की संभावना है। वहीं अग्निशमन द्वितीय अधिकारी ग्रेड पर 29 भर्तियां होनी हैं। होमगार्ड्स के 41,424 पदों पर भर्तियां चल रही हैं। 8 से 15 सितंबर के बीच शारीरिक दक्षता परीक्षा आयोजित की जा रही हैं।
वहीं, 69 हजार शिक्षकों की भर्ती को लेकर आऱक्षित वर्ग के युवा लगातार योगी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं प्रशासन को सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का इंतजार है। सरकार इन पदों पर भी भर्ती की तैयारी में जुटी हुई है। समझा जा रहा है कि सरकार लगभग 40 हजार पदों पर नियुक्ति के लिए अधिसूचना जारी कर सकती है।
भर्ती अभियान की वजह
योगी सरकार का दावा है कि उसने पिछले साढ़े नौ साल में 9.30 लाख रोजगार सृजन किया है। सरकार आगामी यूपी चुनाव से पहले दस साल में दस लाख नौकरियों देने को चुनावी मुद्दा बनाना चाहती है। इसीलिए अगले 4 महीनों में लगभग 70 हजार भर्तियां पूरी करने का अभियान छेड़ा गया है।
यूपी में बेरोजगारी का मुद्दा
बीजेपी और योगी सरकार के सामने सबसे ज्यादा चिंता बेरोजगारी को लेकर है। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दावा किया है कि प्रेश में सिर्फ दो फीसदी ही बेरोजगार हैं। लेकिन सीएमआईई के आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान, बिहार के बाद यूपी में सबसे ज्यादा बेरोजगार हैं।
हालिया सर्वे में पता चला है कि प्रदेश की लगभग 23 फीसदी मतदाता बेरोजगारी को सबसे बड़ा मुद्दा मानते हैं। विपक्ष भी अगले चुनाव से पहले इसे बड़ा मुद्दा बनाने पर आमादा है। वहीं, बीजेपी जीतने के लिए कोई कसर छोड़ना नहीं चाहती।
जेन जी को लेकर बढ़ी चिंता
दिल्ली में जंतर मंतर पर हुए प्रोटेस्ट में यूपी के युवाओं ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। नीट पेपर लीक की आड़ में कांग्रेस भी इसे भुनाने में जुटी हुई है। प्रयागराज में राहुल गांधी को सुनने के लिए जुटी भीड़ ने चिंता और बढ़ा दी है। साथ में बढ़ती महंगाई की वजह से ध्रुवीकरण की राजनीति के परवान चढ़ने के आसार कम हैं। ऐसे में अलग अलग अनुमानों के अनुसार यूपी में लगभग 7 करोड़ 20 लाख जेन जी की आबादी है। जिसमें 2 करोड़ से ज्यादा यानि 15 फीसदी जेन जी यूपी विधानसभा के 2027 में होने वाले चुनाव में मतदान करेंगे।
राजनीतिक दलों को फिक्र इस बात की है कि प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर जेन जी का वोट 3 फीसदी से ज्यादा है। जो कांटे के मुकाबलों में निर्णायक साबित हो सकता है। वहीं, हाल में एक मीडिया सर्वे के मुताबिक यूपी में मुकाबला कांटे का है।
वहीं जंतर मंतर प्रोटेस्ट के दौरान जेनजी को लेकर बीजेपी का असमंजस टेंशन बढ़ा रहा है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के जेन जी के पक्ष में बयान आने से पहले बीजेपी-संघ के नेता और अनुषांगिक संगठनों ने जेन जी से सख्ती से पेश आने की हिमायत की थी। अब योगी सरकार उस भूल-चूक को सुधारने में लगी है।
पेपर लीक पर आंदोलन के बाद प्रदेश की शिक्षा की स्थिति को लेकर भी जेन जी के युवा लगातार सोशल मीडिया में वीडियो औऱ रील बना रहे हैं। जिसकी वजह से योगी सरकार को स्कूलों के वीडियों बनाने पर पाबंदी लगानी पड़ी है।
जो भी हो, कुल मिला कर जेन जी की लोकतांत्रिक ताकत का सियासी दलों को लोहा मानना पड़ा है। जाति और धर्म से ऊपर उठ कर रोजगार, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे राजनीति के केंद्र में आ गए हैं।